Wednesday, January 5, 2011

आज फिर शुरू हुआ

  
           आज फिर शुरू हुआ जीवन
आज मैंने एक छोटी -सी सरल -सी कविता पढ़ी
    आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा
जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया
       आज एक छोटी -सी बच्ची आयी
         किलक मेरे कंधे पर चढ़ी
        आज मैंने आदि से अंत तक
               एक पूरा गान किया
          आज फिर जीवन शुरू हुआ
                      - रघुवीर सहाय

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