प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश की जनता को हर साल ढाढस बंधाते रहे कि मार्च के अन्त तक मंहगाई काबू में आ जाएगी,पर उनका यह आश्वासन छलावा ही साबित हुआ। वर्ष 2004-05 में थोक मुद्रास्फीति6.5 फीसदी थी जो वर्ष 2010-11 में बढ़कर 9.6 फीसदी तक पहुच गयी। अब आंकडो में कम है लेकिन जनता को राहत महसूस नही हो रही ।कांग्रेस के नेता एनडीए सरकार के आंकड़े दिखाकर कह रहे है की वे कौन सा रोक पाए थे। वही नरेन्द्र मोदी उत्पादन का रियल टाइम डाटा रखने और फण्ड बनाने के अतिरिक्त कोई ठोस उपाय नहीं बता पाए है।
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